बदसूरत बत्तख; भाग IV

अपनी खुद की जगह ढूँढ़ने के बारे में एक प्यारी कहानी। हंस क्रिश्चियन एंडरसन की क्लासिकल परिकथा जो सबसे ज्यादा लोकप्रिय परिकथाओं में से एक है।

मध्यम वर्ग
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बदसूरत बत्तख; भाग IV

अपनी खुद की जगह ढूँढ़ने के बारे में एक प्यारी कहानी। हंस क्रिश्चियन एंडरसन की क्लासिकल परिकथा जो सबसे ज्यादा लोकप्रिय परिकथाओं में से एक है।

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"काश मैं सिर्फ़ एक दिन के लिए इनके जैसा दिख सकता!" बत्तख ने उनकी तरफ़ प्रशंसा से देखते हुए कहा। सर्दियाँ आईं और बेंत के खेत की सतह का पानी जम गया। उस बेचारे बत्तख को बर्फ़ में भोजन की तलाश में घर छोड़ना पड़ा। वह थक कर ज़मीन पर गिर गया, लेकिन एक किसान ने उसे पाया और उसने उसे अपनी बड़ी जैकेट की जेब में डाल लिया।
"मैं इसे अपने बच्चों के पास घर ले जाऊँगा। वे इसकी देखभाल करेंगे। बेचारा बत्तख, यह तो जम गया है!" किसान के घर पर बत्तख के बच्चे की बहुत प्यार से देखभाल की गई। इस तरह से, वह बदसूरत बत्तख उस भयंकर सर्दी में बचा रह सका।

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